वृंदावन की कुंजी गलीन मे,

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जीते जी है मरकर देखा, जो था पाया खोकर देखा, खुद को पाया बहुत अकेला,  जो खुद के ही भीतर देखा,, जग का मेला सजा हुआ है, रेला पेला लगा हुआ ...

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